top of page

"धर्मज,पेटलाड,गुजरात"

  • Dec 3, 2022
  • 7 min read

"धर्मज,पेटलाड,गुजरात"

गुजरातमधील पेटलाड या जिल्ह्यातील "धर्मज" या वाणी समाजाच्या गावाची यशोगाथा वाचून त्याचा थोडा अभ्यास केला.माझ्या लाड सका(लाड शाखीय) वाणी समाजाप्रमाणेच मध्य आशियातून भारतात स्थलांतरित झालेल्या "खाडायत" वाणी समाजाचे हे गाव ! सुमारे शंभर वर्षांच्या अथक प्रयत्नातून "केळवणी मंडळ" या "खाडायत" वाणी समाजाच्या "शैक्षणिक संस्थे" च्या एक डझनहून अधिक शाखा संपूर्ण भारतात कार्यरत आहेत.ही मोठी अभिमानाची गोष्ट ! समाजाच्या या शैक्षणिक कार्यामुळे अनेक समाज बांधव उच्च शिक्षण घेऊन जगभर विखुरले गेले आहेत.पण त्यांनी आपल्या गावाशी व समाजाशी असलेली "नाळ" तुटू दिलेली नाही.त्याचे "धर्मज,पेटलाड,गुजरात" हे उत्तम उदाहरण आहे.ते पहायला सारे जग तेथे लोटते आहे.वाचा या गावाबद्दल तसेच या समाजाबद्दल !

"खाडायत" वाणी समाजामध्ये जसा शिक्षणाचा प्रसार होऊ लागला तशा "खाडायत" वाणी समाजाच्या गरजादेखील वाढल्या."खाडायत" वाणी समाज आपल्या व्यवसायामुळे खेडो-पाडी पसरलेला असल्याने खेड्यातून शहरात नातेवाईकांकडे शिकायला आलेल्या मुलांसाठी "खाडायत" वाणी समाजाने वसतिगृहे निर्माण केली. आज मितीस अशी दहा वसतिगृहे कार्यरत आहेत.यथावकाश "खाडायत" वाणी समाजाने "स्त्री शिक्षणा" कडे देखील लक्ष पुरवायला सुरुवात केली. त्यासाठी "खाडायत वाणी महिला विकास मंडळ" स्थापन करण्यात आले."खाडायत" वाणी समाजातील मुलींचे लग्नाचे तत्कालीन प्रचलित असलेले १४ हे वय बदलून ते हळू हळू वाढवत नेले."खाडायत वाणी महिला विकास मंडळ" या संस्थेतर्फे "खाडायत" वाणी समाजातील महिलांना विशेषतः विधवांना व्यवसाय शिक्षण देण्यास सुरुवात केली.उच्च शिक्षण प्राप्त झालेली "खाडायत" वाणी समाजातील तरुण मुले मुंबई, अहमदाबाद, बडोदा अशा मोठ्या शहरांमध्ये स्थायिक होऊ लागली.त्यांच्या तात्पुरत्या निवासाची सोय लावण्यासाठी निवासस्थाने (ब्रह्मचाऱ्याची मठी) उभारण्यात आली.क्वच्चित प्रसंगी खेड्या-पाड्यातून वैद्यकीय उपचारांसाठी मोठ्या शहरात धाव घेणाऱ्या "खाडायत" वाणी समाज बांधवांना देखील त्याचा उपयोग होऊ लागला.संघटनात्मक कार्यात आघाडीवर असलेल्या "खाडायत" वाणी समाज या आदर्श समाजाने या सर्व संस्थांच्या निर्वाहासाठी "जनता धर्मार्थ संस्था" या नावाने एक "न्यास" सुरु केला. अनेक "खाडायत" वाणी समाज बांधव या न्यासाला आर्थिक देणग्या देण्यास तत्परतेने केवळ पुढे येतात असे न्हवे तर अत्यंत आसुसलेले असतात. "खाडायत" वाणी समाजातील अशाच उदार देणगीदारांच्या आश्रयातून गुजरातमधील "महुदी" येथे "कोट्यार्क धाम" येथे "खाडायत" वाणी समाजातील इष्टदेवतेचे मंदिर उभारलेले आपल्याला आढळून येते. तसेच "गोकूळ" व "नाथद्वारा" येथे धर्मशाळा उभारलेल्या आपल्याला पाहायला मिळतात."खाडायत" वाणी समाजातील "जनता धर्मार्थ संस्था" या न्यासाची सामुदायिक विवाह, तरुणांना व्यवसाय मार्गदर्शनासाठी शिबिरे,सहकार तत्वावर चालविली जाणारी दुकाने अशी एक ना अनेक समाजोपयोगी कार्ये आहेत.

"खाडायत" वाणी समाजाला इसवी सन १९१२ साली संघटीत स्वरूप प्राप्त झाले व त्यांची मुंबई येथे "खाडायत वाणी समाज" नावाची संघटना सुरु झाली.या संघटनेचे पहिले अधिवेशन इसवी सन १९१२ साली "नडियाद" येथे संपन्न झाले.इसवी सन १९१६ साली "केळवणी मंडळ" या नावाने खाडायत वाणी समाजाची "शैक्षणिक संस्था" सुरु झाली."खाडायत" वाणी समाजामध्ये शैक्षणिक जागृती व त्यासाठी गरजवंत विद्यार्थ्यांना आर्थिक मदत असा एककलमी कार्यक्रम या संघटनेमार्फत सुरु करण्यात आला व त्याला आज शंभर वर्षांनी चांगली फळे आलेली दिसून येत आहेत.आज "केळवणी मंडळ" या "खाडायत" वाणी समाजाच्या "शैक्षणिक संस्थे" एक डझनहून अधिक शाखा संपूर्ण भारतात कार्यरत आहेत.

"धर्मज,पेटलाड,गुजरात" येथील वाणी समाजाने या गावाचा कसा कायापालट केला आहे ते वाचण्यासारखे आहे.हे कसे साध्य झाले ते सुरेश भोईटेने पाठविलेल्या VDO मधे अवश्य पहा.

या ग्रामविकासा मागची प्रेरणा काय असावी ? त्यासाठी या समाजाची जडण-घडण ब्रिटिश गॅझेटियरमधून समजावून घेतली.वाचा.

1.Lad Bania fathers teach their children business skills.

2.From an early age children are drilled in math and detailed calculations with the end purpose of winning in money transactions.

3.Bania parents often teach their children to "never give; always bargain and make money."

4.This attitude can make them unpopular with other communities. 5.Other castes often resent them because they lend much needed money at high interest rates.

6.A pre-literate farmer might take a loan from a Bania only to find that a high percentage of his harvest will be taken away as interest.

7.Customers often must put their farms or their gold up for collateral in case they cannot pay back their loans.

8.Floor painting and folk songs are a major part of the Bania's art and culture.

9.Nearly all Lad Banias claim the Hindu religion, but as merchants they have chosen gods that reflect their profession. They worship the god of wealth, the god of good fortune and the god of money. The rupee (Indian currency) is sacred with the Bania, and they use old coins for religious ceremonies. Ganesh (the god who helps overcome obstacles) and Lakshmi (the goddess of wealth) are among their favorites. Many are devoted to Vishnu and Shrinathji. Some are Jains, a reform movement of Hinduism.

Ambali;Khasie Lad;Koli Lad;Lad; Lad Bania;Lad Vania;Ladar;Ladia;Ladik; Ladik,Ladar;Ladsi; Ladsi Bunkar; Lajjhad;Theley Lad;Yellegar; अशा विविध उपजाती असलेल्या या लाड वाणी समाजाने "धर्मज,पेटलाड,गुजरात" येथे संपुर्ण देशासाठी एक आदर्श घालून दिलेला आहे.वाचा त्याबद्दल !

1.The village is nicknamed the "village of NRIs" (Non-resident Indians) due to the large number of families who have moved abroad. 

2.It is one of the richest and most developed villages in India.

3.This small village consists of more than 8 bank branches plus its own village cooperative bank.

गाववाल्यांच्या शब्दात त्यांच्याच गावाची माहिती व त्यांचे कर्तुत्व सांगतो.

गुजरात के सबसे ज्यादा सुखी-संपन्न गांव की बात आए और उसमें `धर्मज` का नाम न आए यह संभव ही नहीं. धर्मज गांव में किसी शहर की तरह ही पक्की सड़कें, गटर, पानी, एम्यूजमेंट पार्क, वाटर पार्क, स्वीमिंग पूल, अखाड़ा, लाइब्रेरी, जिम, कंप्यूटर, लैब, लैंग्वेज लेब समेत बड़े रोगों के इलाज के लिए स्पेशल हॉस्पिटल जैसी अनेक सुविधाएं उपलब्ध हैं. साथ ही सरकारी बैंकों की शाखाओं की इस गांव में सुविधा है. वर्ष १९२६ में यहां आधुनिक अखाड़े की स्थापना की गई थी. इसके बाद १९४३ में धर्मज "केलवणी मंडल" की स्थापना की गयी थी और उसके अच्छे परिणामों को आज की पीढ़ी भोग रही है. इस वजह से धर्मज गांव इतना समृद्ध है.गांव की समृद्धि की बात के लिए ग्रामवासी आज भी अपने पूर्वजों का आभार मानना नहीं भूलते हैं, क्योंकि भले ही उन्होंने अपने लिए कोई लग्जरी वस्तुएं नहीं जुटाईं, लेकिन अच्छे शिक्षा संस्थान, अस्पताल, सड़कें जैसी अनेक सुविधाओं को आने वाली पीढ़ी के लिए बनाया और आज उनकी पीढ़ी भी इन सभी सुविधाओं में बढ़ोतरी ही कर रही है.धर्मजवासी आज दुनिया का ऐसा कोई कोना नहीं होगा जहां नहीं रह रहे हों. पिछले आठ दशक से धर्मजवासी लोगों ने विदेश में रहना शुरू किया था तो आज तीसरी पीढ़ी विदेश में रहती है, फिर भी यहां के लोग अपनी मातृ भूमि का ऋण चुकाने में कभी पीछे नहीं रहते हैं.

आज इस गांव का जो विकास हुआ है इसमें मुख्य भूमिका यहां के लोगों की ही है जिनकी आज भी अपने समाज और गांव के लिए भावनाएं जिंदा है.

धर्मज गांव के लोग मात्र पैसे को ही समृद्ध नहीं मानते हैं, लेकिन सर्वांगी विकास को सच्ची समृद्धि मानते हैं. इसी के कारण जो सिटी में नहीं होती ऐसी तमाम सुविधाएं इस गांव में आसानी से मिल जाती हैं. गांववालों की खुद के स्कूल-कॉलेज और एम्यूजमेंट पार्क, स्वयं के अस्पताल और भी अनेक सुविधाएं धर्मज के लोग इस्तेमाल कर रहे हैं.

धर्मज गांव की एक विशेषता यह भी है कि दुनिया के किसी भी कोने में गांव का व्यक्ति रहता हो धर्मज वासियो की स्वयं की एक डिरेक्टरी है और वेबसाइट है जिससे ये लोग एक दूसरे के संपर्क में रहते हैं. साथ ही साल की हर १२ जनवरी को यहां के लोग 'धर्मज-डे' के रूप में मनाते हैं. गांववासी सिर्फ इस एक दिन के लिए दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न हो मगर यहां गांव में पहुंच जाते हैं

इस गांव की एक विशेषता यह भी है कि आसपास की पड़तल जमीन पर यहां के गांववालों ने घोड़ा घास उगा कर रखी है और सस्ते दाम पर स्थानीय पशुपालकों को दी जाती है.एम्यूजमेंट पार्क में बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए फल चीकू, आम और सीताफल जैसे पेड़ लगाए हैं जिससे पंचायत को पेड़ों से भी काफी मुनाफा होता है. 

गुजरात के सबसे ज्यादा सुखी-संपन्न गांव की बात आए और उसमें `धर्मज` का नाम न आए यह संभव ही नहीं. धर्मज गांव में किसी शहर की तरह ही पक्की सड़कें, गटर, पानी, एम्यूजमेंट पार्क, वाटर पार्क, स्वीमिंग पूल, अखाड़ा, लाइब्रेरी, जिम, कंप्यूटर, लैब, लैंग्वेज लेब समेत बड़े रोगों के इलाज के लिए स्पेशल हॉस्पिटल जैसी अनेक सुविधाएं उपलब्ध हैं. साथ ही सरकारी बैंकों की शाखाओं की इस गांव में सुविधा है.

वर्ष १९२६ में यहां आधुनिक अखाड़े की स्थापना की गई थी. इसके बाद १९४३ में धर्मज केलवणी मंडल की स्थापना की गयी थी और उसके अच्छे परिणामों को आज की पीढ़ी भोग रही है. इस वजह से धर्मज गांव इतना समृद्ध है.

गांव की समृद्धि की बात के लिए ग्रामवासी आज भी अपने पूर्वजों का आभार मानना नहीं भूलते हैं, क्योंकि भले ही उन्होंने अपने लिए कोई लग्जरी वस्तुएं नहीं जुटाईं, लेकिन अच्छे शिक्षा संस्थान, अस्पताल, सड़कें जैसी अनेक सुविधाओं को आने वाली पीढ़ी के लिए बनाया और आज उनकी पीढ़ी भी इन सभी सुविधाओं में बढ़ोतरी ही कर रही है.

धर्मजवासी आज दुनिया का ऐसा कोई कोना नहीं होगा जहां नहीं रह रहे हों. पिछले आठ दशक से धर्मजवासी लोगों ने विदेश में रहना शुरू किया था तो आज तीसरी पीढ़ी विदेश में रहती है, फिर भी यहां के लोग अपनी "मातृ भूमिका ऋण" चुकाने में कभी पीछे नहीं रहते हैं.आज इस गांव का जो विकास हुआ है इसमें मुख्य भूमिका यहां के लोगों की ही है जिनकी आज भी अपने समाज और गांव के लिए भावनाएं जिंदा है.धर्मज गांव के लोग मात्र पैसे को ही समृद्ध नहीं मानते हैं, लेकिन सर्वांगी विकास को सच्ची समृद्धि मानते हैं. इसी के कारण जो सिटी में नहीं होती ऐसी तमाम सुविधाएं इस गांव में आसानी से मिल जाती हैं. गांववालों की खुद के स्कूल-कॉलेज और एम्यूजमेंट पार्क, स्वयं के अस्पताल और भी अनेक सुविधाएं धर्मज के लोग इस्तेमाल कर रहे हैं.

धर्मज गांव की एक विशेषता यह भी है कि दुनिया के किसी भी कोने में गांव का व्यक्ति रहता हो धर्मज वासियो की स्वयं की एक डिरेक्टरी है और वेबसाइट है जिससे ये लोग एक दूसरे के संपर्क में रहते हैं. साथ ही साल की हर 12 जनवरी को यहां के लोग 'धर्मज-डे' के रूप में मनाते हैं. गांववासी सिर्फ इस एक दिन के लिए दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न हो मगर यहां गांव में पहुंच जाते हैं.

इस गांव की एक विशेषता यह भी है कि आसपास की पड़तल जमीन पर यहां के गांववालों ने घोड़ा घास उगा कर रखी है और सस्ते दाम पर स्थानीय पशुपालकों को दी जाती है.

एम्यूजमेंट पार्क में बाहर से आने वाले पर्यटकों के लिए फल चीकू, आम और सीताफल जैसे पेड़ लगाए हैं जिससे पंचायत को पेड़ों से भी काफी मुनाफा होता है. 

"धर्मज,पेटलाड,गुजरात" या गावाचा आदर्श सर्वांनी डोळ्यासमोर ठेवल्यास देशाला प्रगतीपथावर नेण्यास वेळ लागणार नाही.

 
 
 

Recent Posts

See All
"Oppenheimer - Part २०"

"Oppenheimer - Part २०" काल रात्री जावई सागर,कन्या किर्ती,बंधू सुहास,वहिनी प्रतिभा व पत्नीची वहिनी माधवी असा सहकुटुंब सहपरिवार घरबसल्या...

 
 
 
"आपटा रेल्वे स्टेशन"

"आपटा रेल्वे स्टेशन" माझ्या आयुष्यात "पनवेल-आपटा रेल्वे स्टेशन" ला मनोरंजनाच्या दृष्टीने अनन्य साधारण महत्व आहे. अकरावी,पी.डी.व...

 
 
 
"मृगागड किल्ला, ता.सुधागड,जि.रायगड"

"मृगागड किल्ला,ता.सुधागड,जि.रायगड" आपला वर्गमित्र बापू घोडके यांने नुकताच "मृगागड किल्ला,ता.सुधागड,जि.रायगड" हा आपल्या सुवर्ण महोत्सवी...

 
 
 

Comments

Rated 0 out of 5 stars.
No ratings yet

Add a rating
bottom of page