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"राग खमाज"

  • dileepbw
  • Sep 4, 2023
  • 3 min read

"राग खमाज"

©दिलीप वाणी,पुणे

रोहिदास व्यवहारेला आज अचानक "मेरी ज़िन्दगी में आते तो कुछ और बात होती" हे गाणे का बरे ऐकावेसे वाटले असावे ? मी त्याचा जवळचा मित्र असल्याने हे गाणे तो कुणासाठी गातो आहे याचा मला साधारण अंदाज आलेला आहे.आज ही या गाण्याला सुमारे २ कोटी श्रोते आहेत.१९६८ साली "कन्यादान" या सिनेमात शशीकपूरने आशा पारेखला उद्देशून म्हणलेले हे अती संवेदनशील गीत तेव्हा देखील फारच लोकप्रिय झाले होते.तेव्हा ३.२ कोटीचा व्यवसाय केला होता या सिनेमाने ! ऐका हे रफीचे गाणे ! मग त्याचे Neurotransmitters सांगतो.

उनकी ज़ुल्फ़ें उनके चेहरे से हटा सकता नहीं

दिल की बेताबी किसी सूरत छुपा सकता नहीं

कितनी दिलकश हैं मोहब्बत की जवां मजबूरियाँ

सामने मंज़िल है और पाँव बढ़ा सकता नहीं

मेरी ज़िन्दगी में आते तो कुछ और बात होती

तो कुछ और बात होती

मेरी ज़िन्दगी में आते तो कुछ और बात होती

तो कुछ और बात होती

ये नसीब जगमगाते तो कुछ और बात होती

तो कुछ और बात होती

कई बार मिल चुकी हैं ये हसीन हसीन निगाहें

कई बार मिल चुकी हैं ये हसीन हसीन निगाहें

वही बेक़रारियाँ हैं ना मिली ख़ुशी का राहें

मेरे दिल से दिल मिलाते तो कुछ और बात होती

तो कुछ और बात होती

मेरी ज़िन्दगी में आते तो कुछ और बात होती

तो कुछ और बात होती

मुझे क्या गरज़ किसी से हँसे फूल या सितारे

मुझे क्या गरज़ किसी से हँसे फूल या सितारे

हैं मेरी नज़र में फीके ये जवाँ जवाँ नज़ारे

अगर आप मुस्कुराते तो कुछ और बात होती

तो कुछ और बात होती

मेरी ज़िन्दगी में आते तो कुछ और बात होती

तो कुछ और बात होती

ये खुशी रहे सलामत यूँही जश्न हो सुहाना

ये खुशी रहे सलामत यूँही जश्न हो सुहाना

जिसे सुन रही है दुनिया मेरे दिल का है तराना

मेरे साथ तुम भी गाते तो कुछ और बात होती

तो कुछ और बात होती

मेरी ज़िन्दगी में आते तो कुछ और बात होती

तो कुछ और बात होती

ये नसीब जगमगाते तो कुछ और बात होती

तो कुछ और बात होती

"बाल विवाह" या तत्कालिन सामाजिक संकल्पने भोवती फिरणारे हे कथानक ! "बाल विवाहबंधन" सोडून अन्य व्यक्तीशी "प्रेमसंबंध" जुळल्याने निर्माण झालेली ही समस्या ! "मिल गए मिल गए आज मेरे सनम";"संडे को प्यार हुआ,मंडे को इकरार हुआ","पराई हू पराई मेरी आरज़ू ना कर";

"फूलों की महक लहरों की लचक";"तुम नहीं भुलते जहां जाओ";"लिखे जो खत तुझे";"मेरी जिंदगी में आते" अशा एकाहून एक सरस गीतांनी ही जटील समस्या कशी अधिकाधिक गुंतत जाते व शेवटी कशी सुटते ते या सिनेमात फार छान दाखवले होते. भावभावनांचे हे गुंते संगीतकार शंकर जयकिशन, गीतकार हसरत जयपुरी व नीरज तसेच गायक  लता मंगेशकर,मोहम्मद रफी,आशा भोसले व महेंद्र कपूर यांनी किती अचूकपणे टिपले आहेत ते कान देऊन ऐकण्यासारखे आहे.आज "राग खमाज" मधे गुंफलेल्या या गीताचे "संगीतशास्त्र" सांगतो.

१,स्वर - आरोहमें रिषभ वर्ज्य। निषाद दोनों। शेष शुद्ध स्वर।

२.जाति - षाढव - सम्पूर्ण

३.थाट - खमाज

४.वादी-संवादी - गंधार/निषाद

५.समय - रात्रिका द्वितीय प्रहर

६.विश्रांति स्थान -सा म प - सा' प ग

७.मुख्य अंग -

ग म प ध ; ग म ग ;

प सा' नि सा';

नि१ ध प ; म प म ग ; रे सा;

८.आरोह-अवरोह-

सा ग म प ध नि सा'

सा' नि१ ध प म ग रे ग सा

९.विशेष - रात्रिके रागोंमें श्रंगार रसके दो रूप, विप्रलंभ तथा उत्तान श्रंगारसे ओत प्रोत है ।

१०.चंचल प्रक्रुति की श्रंगार रस से सजी हुई यह ठुमरी की रगिनी है।

११.इस राग में गंभीरता की कमी के कारण इसमें ख्याल नही गाये जाते।

१२.इस राग में आरोह में धैवत का अपेक्षाक्रुत कम प्रयोग किया जाता है जैसे - 

ग म प ध प प सा' नि१

ध प; ग म प नि सा'।

१३.अवरोह में धैवत से अधिकतर सीधे मध्यम पर आते हैं और पंचम को वक्र रूप से प्रयोग करते हैं जैसे - नि१ ध म प ध म ग।

१४.अवरोह में रिषभ को कण स्वर के रूप में लेते हैं जैसे - म ग रेसा।

१५.इस राग का विस्तार मध्य और तार सप्तक में किया जाता है।

१६.जब इस राग में कई रागों का मिश्रण करके गाते हैं तो उसे 'मिश्र खमाज' नाम दिया जाता है। १७.यह स्वर संगतियाँ राग खमाज का रूप दर्शाती हैं -

नि सा ग म प ; प ध ; म प म ग ; ग म प ध नि सा' ; नि सा' प ; प ध प सा' ; सा' नि ध प ; ध प म प ध प म ग म ; प म ग रे ; ग सा ; सा ग म प ; ग म प ध ; प नि१ ध प ; प ध प नि१ ध प म ग ; म प ग म ग रे ग सा ; सा' रे' सा' सा' नि१ ध प ; म प म म ग रे ग सा ; ,नि१ ,ध सा;

शोधा आता या गीताचे Neurotransmitters !

रोहिदास व्यवहारे असता तर त्याने बरोब्बर सांगीतले असते.


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